अन्तरिक्ष प्रोद्योगिकी एव इसरो के महारथी

अन्तरिक्ष प्रोद्योगिकी – इसके अन्तर्गत हम पृथ्वी पर रहते हुवे अन्तरिक्ष का अध्ययन, अन्तरिक्ष से आने वाली विकिरणो व पिंडो का अध्ययन करना तथा अन्तरिक्ष मे मनुस्य व उपकरण भेजते है।
इतिहास –
• 1957 – USSR ने 4 अक्टूबर 1957 को पहला उपग्रह स्पुतनिक-1 प्रक्षेपण किया

उपग्रह स्पुतनिक-1


1958 यूएस ने नासा (नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) की स्थापना की।

1958 का दिन


1960 -भारत मे अन्तरिक्ष अनुसंधान की शुरुआत हूई
अन्तरिक्ष अनुसंधान का कार्य परमाणु ऊर्जा विभाग को दिया गया, जिसके अध्यक्ष -डा होमी जहाँगीर भाभा थे
1962- INCOSPAR ( इंडियन नेशनल कमेटी फ़ॉर स्पेस रिसर्च)का गठन हूआ
इसके अध्यक्ष -डा विक्रम साराभाई (फादर ऑफ़ इंडियन स्पेस रिसर्च )
1962- TERLS( थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन ) की स्थापना हुई
यह थुम्बा, तिरुवनंतपुरम में स्थित है।
TERLS से पहला साउंडिंग रॉकेट के प्रमोचन हुआ
1969 -ISRO ( भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन )की स्थापना हुई


1969-1972 – नासा द्वारा अपोलो प्रोग्राम चलाया गया
अपोलो-11 – चंद्रमा पर नील आर्मस्ट्रांग को भेजा गया।

चंद्रमा पर नील आर्मस्ट्रांग


1972 – भारत मे अन्तरिक्ष आयोग तथा अन्तरिक्ष विभाग का गठन किया
अन्तरिक्ष आयोग– अन्तरिक्ष क्षेत्र की नीतियो का निर्माण करना।
अध्यक्ष- अन्तरिक्ष विभाग का सचिव होता है
अन्तरिक्ष विभाग – नीतियों का क्रियान्वयन करना
प्रधान-मंत्री के अन्तर्गत होता है

ISRO के अध्यक्ष-
1.  विक्रम साराभाई –  1963 से  1972 तक

2. M. G. K. मेनन जनवरी 1972 से  सितम्बर 1972

3. सतीश धवन 1972 से 1984 तक

4. प्रो.U. R. राव   1984 से 1994 तक

5. के. कस्तुरीरंग   1994 से 2003 तक

6. G. माधवन नायर  2003 से 2009 तक

7. K. राधाकृष्णन  2009 से 2014 तक

 8. शैलेश नायक 1 जनवरी 2015 से12जनवरी2015
 
9. A. S. किरण कुमार   2015 से 2018 तक

10. K. सिवान जनवरी 2018 से अभी तक

इसरो चेयरमैनों के बारे में तथ्य
1. डॉ. विक्रम साराभाई (1963 – 1972) को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पिता माना जाता है.

विक्रम साराभाई ने इन संस्थानों की स्थापना की थी:-
(a) भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL),अहमदाबाद।
(b). भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), अहमदाबाद
(c). विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम
(d). फ़ास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR), कल्पक्कम

2. प्रो. सतीश धवन (1972-1984)


(a). इन्हें भारतीय रॉकेट विज्ञान का जनक माना जाता है.
(b). प्रो. सतीश को भारतीय संचार उपग्रह (INSAT)
और ध्रुवीय उपग्रह लॉन्च वाहन (PSLV) के
परिचालन को सुगम बनाने के लिए हमेशा याद किया जायेगा

3. प्रो. उडुपी रामचंद्र राव (1994-1994)

(a). प्रो. राव ने 1972 में भारत में उपग्रह प्रौद्योगिकी स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
(b). प्रो. राव ने भारत के पहले उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ को डिजाइन करने में मुख्य भूमिका निभाई थी.

4. डॉ कृष्णस्वामी कस्तुरीरंगन (1994-2003)


(a).इसरो के अध्यक्ष के रूप में, कस्तुरीरंगन ने PSLV और GSLV की मदद से भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में कई मील के पत्थर गाड़े थे.
(b). वे भारत के प्रथम दो प्रायोगिक भू-प्रेक्षण उपग्रह, भास्कर-I व भास्कर -II के परियोजना निदेशक भी थे.

5. श्री G.माधवन नायर (2003-2009)
(a). भारत का चाँद पर भेजा गया पहला मिशन “चंद्रयान -1” G. माधवन नायर के चेयरमैन रहते ही भेजा गया था.
(b). इनके 6 साल के चेयरमैन और इसरो सेक्रेटरी के कार्यकाल में दौरान इसरो ने 25 मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया था.
6. डॉ. के. राधाकृष्णन (2009-2014)
भारत का पहला इंटरप्लानेटरी मिशन “मंगलयान” डॉ. के. राधाकृष्णन के चेयरमैन रहने के दौरान ही भेजा गया था.

7. श्री A.S. किरण कुमार (2015 – 2018)


(a).इन्होंने भारत के चंद्रयान-1 और मंगलयान मिशन को सफलता पूर्वक भेजने में अहम् भूमिका निभाई भी.
(b). भारतीय राष्ट्रीय क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली (IRNSS) और जीपीएस एडेड जियो नेविगेशन (GAGAN)का विकास भी इनकी ही देखरेख में किया गया था.

ये सभी इसरो के महारथी है, और इन्ही महापुरुषों की वजह से आज इसरो और भारत देश अन्तरिक्ष मे उंचाईया छु रहा है।

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