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इजराइल और फिलिस्तीन के विवाद का इतिहास

इस सप्ताह मिडिल ईस्ट में इज़राइल और फिलिस्तीन के मध्य चल रहा विवाद फिर से जोरो बढ़ चुका है।
येरुशलयम के आसपास के इलाकों में इजरायली सेना आई और फिलिस्तीनीयो को वहाँ से बाहर निकाल दिया ।
फिर फिलिस्तीन ने गजब पट्टी से इजराइल पर हमला किया और भारी मात्रा में जान माल नुकसान हो रहा है।

विवाद
विवाद
विवादित परिसर

विवाद का इतिहास-

• 957 ईसा पूर्व  में इजराइल के राजा सोलोमन एक परिसर में एक मंदिर का निर्माण करवाया।     
• अरबी/मुस्लिमों और यहूदी के लिए महत्वपूर्ण है।
• यहूदी इसे ‘टेम्पल माउंट’और मुस्लिम इसे  “हराम अल सरीफ”बोलते है ।
•  587 /586 ईसा पूर्व में बेबलोनिया के राजा  इसको तुड़वा दिया था।
तथा इस परिसर पर यहूदी और मुस्लिम दोनों अपना हक जताते हैं इसको लेकर विवाद चल रहा है।
• 20 वी सदी में ये विवाद ने उग्र रूप ले लिया था।

विवाद के कारण –


प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात इजराइल  ब्रिटेन के अधीन था  ओर  यहूदी अल्पसंख्यक थे और अरब अधिकता में थे।
•  1920-40 में यूरोप से यहूदी  पताडित हो कर इजराइल आ गये ।
•  ब्रिटेन इन क्षेत्रों को शांतिपूर्ण तरीके से यहूदी और मुस्लिमों में बांटने में विफल रहा।

सयुंक्त राज्य संघ योजना  –


द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सयुंक्त राज्य संघ ने क्षेत्रों
को बांटने के लिये एक योजना बनाई ।

इजराइल की स्थिति
इजराइल की स्थिति विवाद के दौरान

• फिलिस्तीन,वेस्ट बैंक और गाज़ा पट्टी अरबो को देने की कोशिश की तथा बाकी क्षेत्र इजराइल को देने का कोशिश की।
• विवादित क्षेत्र येरुशलम को अंतरराष्ट्रीय शहर बनाया गया ।
•  ब्रिटेन के जाने यहुदीयो ने स्वीकार बाद मुस्लिमों ने  ये नही माना।
•  इस योजना में इजराइल को 55 प्रतिशत तथा 45 प्रतिशत अरबो को मिला।

अल नकबा / इजराइली अरब प्रथम युद्ध-


•  जून 1948 -फिलिस्तीन व अरब देश ( सीरिया , लेबनान , जोर्डन) ने  इजराइल पर हमला कर दिया।
• इजराइल ने जीत कर काफी क्षेत्रों को कब्जे में ले लिया था येरुशलयम दो भाग में बंट गया
         1 पूवी भाग  जॉर्डन के पास
         2 पश्चिमी भाग  इजराइल के पास

•  युद्ध के बाद इजराइल के पास 78 प्रतिशत तथा बाकी 22 प्रतिशत  ग्रीस ऒर जोर्डन के पास चला गया ।


छः दिनों का युद्ध  1967 – 


•  इसके बाद इजराइल के पास पुरा येरुशलयम आ गया ।
•    तभी से इजराइल ओर फिलिस्तीन के मध्य विवाद चलता आ रहा है।


मूल लेखक– राम नारायण विश्नोई

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