ऑपरेशन ब्लू स्टार : Operation Blue-Star Special Ops India

पांच जून का दिन देश के सिखों के जहन में एक दुखद घटना के साथ नक्श है।भारतीय सेना ने इस दौरान अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में प्रवेश करके आपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम दिया था।
इतिहास-  आजादी के बाद सिक्ख ग्रुप ने अलग सिक्ख राज्य की मांग की जिसको  खारिज कर दिया गया।
आनन्दपुर साहिब सकल्प 1973 – आनन्दपुर साहिब  मे एक बेठक हुवी जिसमे सिक्खों की पहचान को  बचने के लिये भारत की व्यवस्था मे बदलाव की मांग की जो इस प्रकार है
1 चंडीगढ़ को पूरी तरह से पंजाब को दिया जाये।
2 हरियाणा  के पंजाबी भाषी सीमांत भाग को पंजाब  को दिया जाये।
3 केन्द्र राज्यो मे हस्तक्षेप ना करे।
4 फौज मे सिक्खों की ज्यादा भर्ती हो।

परन्तु 1982 तक इसको भुला दिया गया तथा  अकाली दल वजरनैल सिंह भिंडरावाले ने फिर से मांग की।
  इन्दिरा गाँधी  ने  इन मांगो  को देशविध्रोही, अलगाववादी  बताया तथा  एक अलग देश खालिस्तान की मांग माना व  विरोध किया।

1975-77 आपातकाल के बाद चुनावों मे केन्द्र एवं  पंजाब  मे कांग्रेस सरकार नही रही। पंजाब मे अकाली दल  की सरकार बनी।

पंजाब मे अकाली दल के बढते प्रभाव को  कम करने के लिये कांग्रेस को एसे किसी की तलाश थी जो अकाली का प्रभाव कम करे एवं सिखों के मतो को कांग्रेस की तरफ लाये इसी लिए कांग्रेस ने जरनैल सिंह भिंडरावाले को आर्थिक एवं राजनितिक रुप से समर्थन दिया।

जरनैल सिंह भिंडरावाले –  अपने अनुयाइयों  के लिये सन्त  एवं कुछ लोगो के लिये सिपाही थे। इसी वजह से इनको ” सैंट सोल्जर ” की उपाधि मिली।
जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थकारी हथियारबन्द  घूमते  थे।

ऑपरेशन ब्लू स्टार- जरनैल सिंह  भिंडरावाले व हथियारबन्द समर्थनकारी
जरनैल सिंह  भिंडरावाले व हथियारबन्द समर्थनकारी

1980 – चुनावों मे कांग्रेस की विजय हुवी। पंजाब के  मुख्यमंत्री  दरबारा सिंह बने।जो जरनैल सिंह  भिंडरावाले के कार्यो के खिलाफ थे।

1981 –  जनगणना के दौरान जरनैल सिंह भिंडरावाले के  समर्थकों ने पंजाब केशरी अखबार के सम्पादक की हत्या  कर दी।
1982 – जरनैल सिंह भिंडरावाले ने  फिर से अकाली दल से  हाथ मिला कर प्रदर्शन एवं  दंगे किये जिनको रोकने मे  30000 की गिरफ्तारी  एवं  100  की मौत  हो गई।

नवम्बर 1982 –  जरनैल सिंह भिंडरावाले ने  दिल्ली मे  एशियाई  गेम्स  के दौरान प्रदर्शन  करने का सोचा तो  सरकार ने  दिल्ली मे आने वाले सभी सिक्खो की तलाशी ली जिनमे कुछ सेना के बडे अधिकारी  शामिल थे जो क्रोधित हो गये।
अप्रैल 1983- जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थको ने हरिमन्दिर साहिब( अमृतसर स्वर्ण मंदिर ) में हथियारों  के साथ रहना शूरू कर दिया।
पंजाब में जगह जगह  हिंदुओ की हत्याएँ होने लग गई।  पंजाब मे अशांति फेल गई।

ओपरेशन ब्लू स्टार-   (3 जुन – 8 जुन 1984)
बनाने  का करना- जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थकारियो  ने हरिमन्दिर साहिब( अमृतसर स्वर्ण मंदिर ) के अकाल तख़्त पर कब्जा कर भारी मात्रा मे हथियारो को एकत्रित  करना शुरू कर दिया।

हरिमन्दिर साहिब

अकाल तख्त – सिक्खों का सबसे धार्मिक स्थल जहाँ उनके गुरु बेठते थे।
जरनैल सिंह भिंडरावाले के अनुसार पुलिस एवं सेना कभी  यहाँ हमला नही कर सकती ।

  लक्ष्य – जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थकारी जो अकाल तख्त पर कब्जा कर बेठे है उनको बाहर निकला एवं  पंजाब  मे शान्ति लाना।
1  जुन 1984 को पंजाब में कर्फ़्यू लगाया गया एवं सेना और पेरामिलिट्री ने कमान संभाली।
  3 जून 1984 –  गुरु अर्जून देव के शहीद दिवस पर आये हुवे आम जनता को हरिमन्दिर साहिब से बाहर जाने से रोक दिया गया।

ऑपरेशन ब्लू स्टार- भारतीय फौज की कमान मेजर जनरल कुलदीप सिंह  बरार को  दी गयी।
वही दुसरी ओर जरनैल सिंह भिंडरावाले  के समर्थकारी  को मेजर जनरल साबेगसिद ने हथियारों का  ज्ञान दिया।
इस ओपरेशन मे जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थकारी  के पास अत्याधुनिक हथियारो को वजह से सेना को भी टेंक की मदद लेनी पडी।
अकाल तख्त  से कब्जा छुडवाया।
परिणाम –1- अकाल तख्त की ईमारत को भारी नूकसान हुआ। तथा  पुस्तकालय  को भी नुकसान हुआ एवं  काफी ग्रन्थ जल गये। जिससे सिक्खो की धार्मिक भावनाओ को ठेस पहुंची।
2- भारतीय फौज के 83 जवान शहीद ओर 248 जवान घायल हुवे
3- 500 विध्रोहीयो मारे गये।
4-जरनैल सिंह भिंडरावाले भी मारे गये।

अकाल तख्त
ऑपरेशन ब्लू स्टार- मेजर कुलदीप सिंह
मेजर कुलदीप सिंह

ओपरेशन के पश्चात  घटनाएँ
1-  31 अक्टूबर  1984 को  इन्दिरा गाँधी  की हत्या  कर दी गयी।
2- 1985  मे एयर इंडिया  के कनिष्क जहाज में सवार  329 लोगो को बोम्ब  से उडा दिया गया।
3-1986  ऑपरेशन ब्लू के समय के आर्मी चीप ए.स.वेध की भी हत्या  कर दी गयी थी।

ऑपरेशन मे भले ही भरतीय सेना की विजय हुई परंतु इन्दिरा गाँधी की एक बहुत ही बडी राजनीतिक भुल साबित हुवी।  लाखो की संख्या में नवजवानों  को परेशानी हुई।



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