यूनिट 731(Human Experiment Unit)

जापानी सैनिक ने चीन में रिसर्च और स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के लिए एक यूनिट बनाई, जिसका नाम रखा गया- ‘यूनिट 731’. इस यूनिट का आधिकारिक नाम महामारी निवारण और जल शुद्धिकरण विभाग था. इस यूनिट को मूल रूप से जापाकेम्पेटाई सैन्य पुलिस ने गठित की थी और इसका मुख्य लीडर जनरल शीरो ईशी. इस यूनिट में कई तरह की जानलेवा बिमारियों पर शोध की जाती थी. इस शोध के लिए दुश्मन सेना के बंदी बनाए हुए कैदियों को अपना विषय बनाया जाता था. उन कैदियों के शरीर में जानलेवा बिमारियों के विषाणु छोड़े जाते थे, जिससे उनके अंदर होने वाले बदलाव का पता लगाया जा सके.

unit 731

क्या था ‘यूनिट 731‘-
यूनिट 731 को चीन के पिंगफांग शहर में बसाया गया था , जो बाद में जाकर तबाही का सबसे बड़ा केंद्र बना.
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यह दुनिया के सबसे खतरनाक प्रयोगशालाओं में से एक था। असल में यह जापानी सेना द्वारा बनाई गई एक ऐसी गुप्त लैब (प्रयोगशाला) थी, जिसे इतिहास का सबसे खौफनाक टॉर्चर हाउस माना जाता है। यह लैब भले ही चीन के पिंगफांग जिले में था, लेकिन इसका संचालन जापानी सेना करती थी।
जापान की इंपरियल आर्मी यहां इंसानों पर जानलेवा और घातक एक्सपेरिमेंट किया करती थी. शुरुआत में ये प्रयोग चीनी सेना की सिपाहियों के ऊपर किया जाता था, लेकिन बाद में ये आम नागरिकों पर भी किया जाने लगा. इस प्रयोग का मकसद था- भयंकर से भयंकर बीमारियों का मानव शरीर पर होने वाले असर को देखना. इस प्रयोग के दौरान क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं. यहां तक कि, गर्भवती महिलाओं के पेट को चीर-फाड़ कर उनके शरीर में प्लेग जैसे खतनाक बीमारियों के जीवाणु छोड़े जाते थे.और ये सबकुछ उन्हें होश में रखकर किया जाता था. ‘यूनिट 731’ ने चीनी आर्मी पर कई खतरनाक प्रयोग किए थे. जैसे:
फ्रॉस्टबाइट टेस्टिंग– इस प्रयोग के दौरान कैदियों के हाथ को बर्फ से भरे ठंडे पानी मे डालकर तब तक रखा जाता था, जब तक उसका हाथ बर्फ से पूरी तरह ढक न जाए. कभी-कभी कैदियों के हाथ को खौलते हुए पानी और आग में डाल दिया जाता था, सिर्फ ये देखने के लिए की उनके हाथ कितनी तकलीफ झेल सकते हैं.

हथियारों का प्रशिक्षण– जापानी आर्मी अपने हथियारों के प्रशिक्षण के लिए कैदियों का इस्तेमाल करती थी. कैदियों को बांधकर उनपर गोला-बारूद फेका जाता था. इसके अलावा तरह-तरह के हथियारों का इस्तेमाल उनपर किया जाता था, और उसके बाद उन्हें लगने वाले चोट और घाव का निरीक्षण किया जाता था. सिर्फ इतना ही नहीं, कैदियों को बिना खाना-पानी दिए बगैर बंदी बनाकर रखा जाता था, सिर्फ ये देखने के लिए की वह लोग कितने दिन तक जिंदा रह सकते हैं.

सिफलिस एक्सपेरिमेंट– उस दौरान इजिप्ट में एक जानलेवा बीमारी फैल रही थी, जिसका नाम था सिफलिस.जापान ने इस बीमारी का अध्ययन करने के लिए इसके जीवाणु बंदी बनाये हुए कैदियों में डाल दिये थे.इस बीमारी को फैलाने के लिए इससे ग्रसित हुए कैदियों को वह चीन के औरतों के साथ जबरदस्ती संबंध बनाने के लिए भी मजबूर करते थे.बलात्कार और औरतों को गर्भधारण करने के लिए किया जाता था मजूबर – महिला कैदियों के साथ जापानी आर्मी जबरदस्ती संबंध बनाकर उन्हें गर्भधारण के लिए मजबूर करती थी. जिसके बाद गर्भवती महिलाओं के ऊपर वह तरह-तरह के हथियारों का प्रयोग करती थी. इतना ही नहीं, वह उनके शरीर में जानलेवा बीमारियों के जीवाणु भी छोड़ देते थे, सिर्फ ये देखने के लिए की वो कितने दिन तक जिंदा रह पाती है.

सिफलिस एक्सपेरिमेंट

अगस्त 1945 में, हिरोशिमा और नागासाकी दोनों पर बमबारी होने के बाद, सोवियत सेना ने मंचूरिया पर आक्रमण कर दिया. इस लड़ाई में जापानी सेना बुरी तरह से हार गई और यूनिट 731 को आधिकारिक रूप से भंग कर दिया गया था.हालांकि, इस यूनिट में किए गए ज्यादातार प्रयोग को जला दिया गया था. इसके साथ ही जापान ने 13 वर्षों के रिसर्च में पाए गए सभी उपयोगी जानकारी को भी नष्ट कर दिया.यूनिट 731 को जापानी सेना ने जैविक हथियार बनाने के लिए शुरू किया था, ताकि वो अपने दुश्मनों पर इसका इस्तेमाल कर सकें। वो यहां जिंदा इंसानों के शरीर में खतरनाक वायरस और केमिकल्स डालकर उनपर प्रयोग करते थे। इंसानों को इस लैब में ऐसी-ऐसी यातनाएं दी जाती थीं, जिसके बारे में शायद ही आपने कभी सोचा हो।

इस लैब में चीन, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से पकड़े गए लोगों पर जानवरों की तरह प्रयोग होते थे। ऐसे प्रयोग करने के लिए 3000 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था।

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