राम मन्दिर का संघर्ष

poster by Sneha Rai

आयोध्या

हिंदुओं की प्रतीक पवित्र तीर्थस्थल अयोध्या भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक अति प्राचीन धार्मिक नगर है. यह नगर पवित्र सरयू नदी के तट पर बसा हुआ है. रामायण के मुताबिक अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी
492 साल बाद अयोध्या में फिर से राम मंदिर बनने जा रहा है। 5 अगस्त 2020 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन करके इसकी शुरुआत की। वहीं, 30 साल 8 महीने 27 दिन बाद ये दूसरा मौका होगा, जब राम मंदिर के लिए शिलान्यास होगा।
इन 492 सालों में अयोध्या ने कई पड़ाव देखे। मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनी। मस्जिद टूटी फिर बनी, फिर टूटी। 167 साल पहले मंदिर को लेकर पहली बार अयोध्या में हिंसा हुई तो 162 साल पहले इस विवाद में पहली एफआईआर हुई। 135 साल पहले मामला कोर्ट तक पहुंचा और 8 महीने 27 दिन पहले रामलला के पुन: विराजमान होने का सुप्रीम फैसला आया।
राम मन्दिर विवाद का इतिहास-
1528 : बाबर के सूबेदार मीरबाकी ने अयोध्या में मस्जिद बनवाई। बाबर के सम्मान में इसे बाबरी मस्जिद नाम दिया गया।
1853 : मुगलों और नवाबों के शासन के चलते 1528 से 1853 तक इस मामले में हिंदू बहुत मुखर नहीं हो पाए, पर मुगलों और नवाबों का शासन कमजोर पड़ने तथा अंग्रेजी हुकूमत के प्रभावी होने के साथ ही हिंदुओं ने यह मामला उठाया और कहा कि भगवान राम के जन्मस्थान मंदिर को तोड़कर मस्जिद बना ली गई। इसको लेकर हिंदुओं और मुसलमानों में झगड़ा हो गया।
अवध के नवाब वाजिद अली शाह के समय पहली बार अयोध्या में सांप्रदायिक हिंसा भड़की। हिंदू समुदाय ने कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई।
1859 : अंग्रेजी हुकूमत ने तारों की एक बाड़ खड़ी कर विवादित भूमि के आंतरिक और बाहरी परिसर में मुस्लिमों तथा हिंदुओं को अलग-अलग पूजा और नमाज की इजाजत दे दी।
1885: महंत रघुबर दास ने फैजाबाद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाने के लिए याचिका लगाई। कोर्ट ने याचिका रद्द कर दी।
1949 : विवादित स्थल पर गुम्बद के नीचे रामलला की मूर्ति स्थापित की गई। मामले में एफआईआर हुई। परिसर का गेट लॉक कर दिया गया।
1950 : हिंदू महासभा के वकील गोपाल विशारद और परमहंस रामचंद्र दास ने फैजाबाद जिला अदालत में अर्जी दाखिल कर रामलला की मूर्ति की पूजा का अधिकार देने की मांग की।
1959 : रामानंद संप्रदाय की तरफ से निर्मोही अखाड़े के छह व्यक्तियों ने मुकदमा दायर कर इस स्थान पर अपना दावा ठोका। साथ ही मांग की कि रिसीवर प्रियदत्त राम को हटाकर उन्हें पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए। यह उनका अधिकार है।
1961 : सुन्नी वक्फ बोर्ड (सेंट्रल) ने मूर्ति स्थापित किए जाने के खिलाफ कोर्ट में अर्जी लगाई और मस्जिद व आसपास की जमीन पर अपना हक जताया।
1981 : उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने जमीन के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया।

8 अप्रैल 1984: दिल्ली के विज्ञान भवन में राम मंदिर निर्माण के लिए एक विशाल धर्म संसद का भी आयोजन किया गया।
1986: लोकल कोर्ट ने पूजा के लिए परिसर का लॉक खोलने की अनुमति दी। इससे विवाद को हवा मिली।
1989: एक जुलाई को रिटायर्ड जज देवकी नंदन अग्रवाल ने फैजाबाद कोर्ट में राम के मित्र के रूप में याचिका लगाई।
1989 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित स्थल पर यथास्थिति बरकरार रखने को कहा।
9 नवंबर 1989:
मंदिर का शिलान्यास हुआ, दलित समुदाय के कामेश्वर चौपाल ने पहली ईंट रखी। कामेश्वर अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं।
कारसेवा आंदोलन
24 मई 1990- हरिद्वार में विराट हिंदू सम्मेलन हुआ। संतों ने देवोत्थान एकादशी (30 अक्तूबर 1990) को मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा की घोषणा की।

1 सितंबर 1990
अयोध्या में अरणी मंथन कार्यक्रम हआ और उससे अग्नि प्रज्ज्वलित की गई। विहिप ने इसे ‘राम ज्योति’ नाम दिया। इस ज्योति को गांव-गांव पहुंचाने के अभियान के सहारे विहिप ने लोगों को कारसेवा में हिस्सेदारी के लिए तैयार किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कारसेवा पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।
1990: लालकृष्ण आडवाणी ने देशभर से राम मंदिर के लिए समर्थन जुटाने के लिए रथ यात्रा शुरू की।

रथयात्रा

6 दिसंबर 1992 : को अयोध्या में विवादित ढांचा ढहा दिया गया।

विवादित भूमि

8 दिसंबर 1992 : अयोध्या मेें कर्फ्यू लगा था। वकील हरिशंकर जैन ने उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में गुहार लगाई कि भगवान भूखे हैं। राम भोग की अनुमति दी जाए।
लिब्राहन आयोग-
16 दिसंबर 1992 : ढांचे ढहाने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए लिब्राहन आयोग गठित किया। इसे 16 मार्च 1993 को रिपोर्ट सौंपनी थी।

1993: केंद्र ने विवादित इलाके के आसपास के 67.7 एकड़ इलाके को अपने कब्जे में ले लिया।
1994: केंद्र के फैसले के खिलाफ लगी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस्लाम में नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है। इसके लिए मस्जिद का होना जरूरी नहीं है।
2002 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित ढांचे वाली जमीन के मालिकाना हक को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की।
2003: सुप्रीम कोर्ट ने विवादित क्षेत्र में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि पर रोक लगाई। आर्कोलियॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट जमा की। इसमें विवादित जगह पर किसी पुराने ढांचे के होने की बात की गई।
2009: लिब्राहन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 68 लोगों पर कार्रवाई की सिफारिश की। इसमें अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे बड़े भाजपा नेताओं के नाम थे।

लिब्राहन आयोग रिपोर्ट

2010 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2:1 से फैसला दिया और विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच तीन हिस्सों में बराबर बांट दिया।
2011 : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।
2016 : सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण की इजाजत मांगी।
2017: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कोर्ट के बाहर मामला सुलझाने की सुझाव दिया।
2018 : सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद को लेकर दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की।
जनवरी 2019: सुप्रीम कोर्ट ने केस की सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 5 जजों की बेंच बनाई।

6 अगस्त 2019 : सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर हिंदू और मुस्लिम पक्ष की अपीलों पर सुनवाई शुरू की।
16 अक्टूबर 2019 : सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी हुई।
9 नवंबर 2019: सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित स्थल को श्रीराम जन्मभूमि माना और 2.77 एकड़ भूमि रामलला के स्वामित्व की मानी । निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावों को खारिज कर दिया। निर्देश दिया कि मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार तीन महीने में ट्रस्ट बनाए और ट्रस्ट निर्मोही अखाड़े के एक प्रतिनिधि को शामिल करे। उत्तर प्रदेश की सरकार मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक रूप से मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ भूमि किसी उपयुक्त स्थान पर उपलब्ध कराए ।

5 फरवरी 2020 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की घोषणा की।

5 अगस्त 2020 : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया। तथा आयोध्या को वेसे ही सजाया गया है जेसे भगवान श्री राम वनवास से लौट रहे है।

भूमिपूजन

इस भव्य भूमिपूजन को देख कर यही लगा जेसे “चप्पा चप्पा भर जायेगा , श्री राम के दीवानो से
सारा देश गूँज उठेगा, श्री राम के जयकारो से”।।

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