क्या है आखिर भूलने की समस्या- कारण एवं उपचार

क्यो हो जाती है याददाश्त कमजोर? किस उम्र में भूलने की बीमारी होती है?

भूलना या याददाश्त का कमजोर पड़ना यह सब कैसे होने लगता है। इस प्रकार भूलने की समस्या, हर इंसान अपनी जिंदगी में कभी न कभी महसूस अवश्य करता है। परन्तु बहुत कम लोग हैं जिनको इस समस्या के बारे में सही जानकारी होती हैं। बेटा दिमाग के लिए बादाम और घी खाया करो।

मुझे दीपक की तरह याद क्यों नहीं रहता? आखिरकार वो क्या खाता है? तुम तो भुलक्कड़ होते जा रहे हो। यह सभी बातें याददाश्त से सम्बधित है जिसे मेमोरी कहा जाता है।

अलीगढ़ के जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में कई मरीज़ यह समस्या लेकर आते है कि जब वह छोटे थे सब याद रहता था और अब जितना बड़ा हो रहा हूॅ, सब भूलता जा रहा, दिमाग दिन पर दिन कमजोर होता जा रहा है।

भूलने की समस्या, हर इंसान अपनी जिंदगी में कभी न कभी महसूस अवश्य करता है।

जी हां, यह भूलने की समस्या की सच्चाई हो सकती है।

जैसे-जैसे इंसान बड़ा होता जाता है उसे जीवन में बहुत कुछ चलता रहता है। जिसके तहत उसको हर बात याद रखना मुश्किल हो जाता है और वो भूलने लगता है। भूलने की बीमारी के बारे में जानने से पहले हम मेमोरी की बारे जानेंगे।

मेमोरी तीन तरह की होती है-

  1. इमीडियेट मेमोरी
  2. र्सोट टर्म मेमोरी
  3. लॉन्ग टर्म मेमोरी

इमीडियेट मेमोरीकुछ सेकंड तक किसी चीज को याद रखना इमीडियेट मेमोरी में स्टोर होता है।
र्सोट टर्म मेमोरी– इसमें व्यक्ति कुछ दिनों से लेकर महीने तक चीजों को याद रखने की क्षमता रखता है।
लॉन्ग टर्म मेमोरी– इसमें व्यक्ति सालों पुरानी यादो को, चीजो को अपने दिमाग में स्टोर कर के रखता है।

याददाश्त या मेमोरी को बनाये रखने के लिए, व्यक्ति कई तरह की क्रियाये करता है।

जैसे

सबसे पहले दिमाग अपने आस-पास के वातावरण, बातचीत, शक्लों , घटनाओं, चित्रों आदि को शरीर की ज्ञानेन्द्रियों से अनुभव कर विशेष संकेतोें में बदल लेता है। फिर यह संकेत दिमाग में एकत्रत्रित हो जाते है।और ज़ोर डालने पर दिमाग में इकट्ठा किये गए संकेतों को पढ़कर इंसान को वही बातचीत, शक्ल या घटनाएं आदि याद आ जाती है।

भूलने की समस्या या बीमारी एवं मेमोरी के बारे के जानने के साथ-साथ यह जानना जरूरी है कि यह किस उम्र में होती है।

भूलने की बीमारी 60 साल की उम्र में होती है।कभी-कभी यह देखा गया है कि 45 साल की उम्र से इस बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगते है। अगर हम अपने दैनिक दिनचर्या में सामान्यता चीजों को भूल जाते है वैसे तो हर कोई व्यक्ति कभी न कभी कुछ न कुछ भूल जाता है।

जैसे-स्कूटर या कार को लाॅक न करना, पैसे रख कर भूल जाना, तो वह आम बात है।अगर ऐसा बार-बार हो रहा है जैसे- लोगों के नाम या यह भूल जाना की कहां मिले थे, दिन, तारीख, महीना, साल भूल जाना, खाना खा कर भूल जाना । खाना माँगना यह कह कर की खाना कब दिया था या कब खाया था।रास्ते भूल जाना आदि।

भूलने की बीमारी डेमेंटिया/अल्झाइमर

अगर यह लक्षण बहुत ज्यादा होने लगे है और साथ ही साथ आप की उम्र भी है ।तो मान सकते है कि आपको भूलने की बीमारी डेमेंटिया/अल्झाइमर हो गयी है।

क्या कारण होते है भूलने की बीमारी के

अब हम कारणों को जानेंगे।

  • मानसिक थकान व दवाब
  • सिर में चोट लग जाना
  • डेमेंटिया व न्यूरोलाॅजिकल बीमारी
  • ज्यादा मात्रा में नशा लेना
  • ज्यादा तनाव ग्रस्त रहना
  • दौरे बार-बार पड़ना
  • अनिद्रा

-आदि कारण हो सकते है।

उपचार

भूलने की बीमारी अगर आप के किसी अपने को हो रही है तो तुरन्त किसी भी मनोचिकित्सक व क्लीनिकॅल साइकोलॅाजिस्ट से सम्पर्क करें। इस बीमारी में दवा के साथ-साथ साइकोलॅाजिकल थैरेपी के द्वारा इलाज किया जाता है। दवा से बीमारी की भूलने की क्षमता को रोका जाता है। परन्तु जब समय रहते किया जाये।

इस बीमारी को जल्दी कंट्रोल करना हो तो परिवार का सहयोग होना बहुत जरूरी है। परिवार के सहयोग के बिना बीमारी के बढ़ने की क्षमता और बढ़ जाती है।

मूल लेखकपूजा कुलश्रेष्ठ


संपादनआयुष जोशी

विशेष छवि श्रेयनारी . पंजाब केसरी

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Ayush Joshi
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